हल्द्वानी शुद्धिकरण प्रकरण में आया नया मोड़, सवालों के घेरे में आए राहुल गांधी पर FIR करने वाला

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उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक खड़गे की रैली स्थल का शुद्धीकरण मामले ने नया मोड़ ले लिया है। ये मोड़ ऐसा है कि इससे राहुल गांधी को न सिर्फ बड़ी राहत मिल सकती है बल्कि बीजेपी की भी किरकिरी हो सकती है।

शिकायतकर्ता की जाति पर खड़े हुए सवाल

दरअसल हल्द्वानी में राहुल गांधी के खिलाफ तहरीर देने वाले शख्स की जाति पर ही सवाल खड़ा हो गया है। वाल्मिकी समाज ने आरोप लगाया है कि जिस अमित कुमार ने खुद को दलित और वाल्मिकी समाज का बताते हुए राहुल गांधी के खिलाफ तहरीर दी है वो शख्स वाल्मिकी समाज से आता ही नहीं है। यही नहीं वाल्मिकी समाज के लोगों ने हल्द्वानी की उसी कोतवाली के सामने प्रदर्शन किया है जिस कोतवाली में राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।

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वाल्मीकि समाज ने शिकायतकर्ता पर लगाए गंभीर आरोप

वाल्मीकि समाज के लोगों का आरोप है कि अमित कुमार झूठ बोलकर खुद को वाल्मीकि बता रहा है, बावजूद इसके उसने कथित तौर पर अपना नाम ‘अमित कुमार वाल्मीकि समाज से बताते हुए राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। शिकायतकर्ताओं ने अमित कुमार को एक भाजपा नेता का भाई भी बताया है। वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि अमित कुमार का उनके समाज से कोई लेना-देना नहीं है और उसके द्वारा खुद को वाल्मीकि समाज से संबंधित बताकर मुकदमा दर्ज कराया जाना समाज के नाम का गलत इस्तेमाल है।

पुलिस को सौंपी तहरीर

वाल्मीकि समाज के लोगों ने इस संबंध में पुलिस को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की जांच कराने के साथ ही कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि पुलिस इन तथ्यों की जांच कर यह स्पष्ट करे कि मुकदमा दर्ज कराने वाले व्यक्ति की वास्तविक पहचान और वाल्मीकि समाज से क्या संबंध है। हालांकि इस मामले में पुलिस अभी कुछ भी कहने से बच रही है।

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अगर वाल्मिकी समाज के आरोपों में सच्चाई होती है तो राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर का पूरा मामला अब उलटा पड़ने सकता है। इस विवाद ने शुद्धीकरण मसले को एक नया रंग दे दिया है। वाल्मीकि समाज के आरोप सही पाए जाते हैं तो इसमें नैनीताल पुलिस की किरकिरी होना भी लाजमी है। इसके साथ ही उत्तराखंड बीजेपी को भी इस मसले पर फिर एक बार बैकफुट पर जाना पड़ सकता है।

ये था मामला

दरअसल, 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा की थी। इसके तीन दिन बाद, 11 अगस्त को इसी मैदान में धार्मिक अनुष्ठान और गंगाजल छिड़कने का मामला सामने आया। कांग्रेस ने इसे ‘शुद्धिकरण’ बताते हुए दलित समाज के अपमान से जोड़ दिया और आरोप लगाया कि यह आयोजन खड़गे की जातिगत पहचान के कारण किया गया। दूसरी ओर भाजपा शुरू से इसे तथ्यहीन आरोप बताते हुए कांग्रेस पर संवेदनशील विषय को राजनीतिक और जातिगत रंग देने का आरोप लगाती रही है।

Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.

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