उत्तराखंड की मछली ने विदेश में बनाई पहचान, 30 टन निर्यात की तैयारी : मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा

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  • इंटरनेशनल मार्केट में पहुंची उत्तराखंड की मछली
  • राज्य बनने के बाद पहली बार पांच मीट्रिक टन रेनबो ट्राउट मछली का निर्यात
  • पिथौरागढ़ की तीन सहकारी समितियों ने किया था प्रोडक्शन
  • आने वाले दिनों में 30 टन मछली सप्लाई करने की तैयारी

देहरादून : राज्य निर्माण के बाद पहली बार उत्तराखंड की मछली इंटरनेशनल मार्केट में पहुंची हैं। पिथौरागढ़ जिले की तीन सहकारी समितियों ने राज्य सरकार के सहयोग से नेपाल को पांच मीट्रिक टन मछलियां सप्लाई की हैं। अच्छी खबर ये भी है कि उत्तराखंड आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछलियों के निर्यात की तैयारी कर रहा है।

राज्य सचिवालय के मीडिया सेंटर में शुक्रवार को मत्स्य विकास मंत्री सौरभ बहुगुणा ने प्रेस काॅफ्रेंस में यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि पिथौरागढ़ के धारचूला एवं मुनस्यारी क्षेत्र की तीन मत्स्य जीवी सहकारी समितियों ने ये मछलियां तैयार की थीं। कोल्ड-चेन बनाए रखते हुए मछली को गुजरात के वेरावल भेजा गया, जहां प्रसंस्करण के बाद 23 जून 2026 को नेपाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका सफलतापूर्वक निर्यात किया गया। इससे 33 मत्स्य पालकों को लगभग ₹23.50 लाख की आय प्राप्त हुई है।

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कैबिनेेट मंत्री के अनुसार-उत्तराखंड के इस पहले निर्यात को प्रोत्साहित करने हेतु मत्स्य विभाग ने हार्वेस्टिंग, पैकेजिंग एवं परिवहन के लिए ₹5.40 लाख की गैप फंडिंग सहायता प्रदान की। उन्होंने कहा कि दुबई में आयोजित गल्फ फूड एक्सपो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों एवं हितधारकों से स्थापित संपर्को का यह सकारात्मक परिणाम है। विभाग अब यूरोप, मध्य-पूर्व तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य बाजारों में भी निर्यात की संभावनाओं पर कार्य कर रहा है। इस क्रम में आने वाले दिनों में करीब 30 टन मछली का निर्यात विदेशों में किए जाने की तैयारी की जा रही है।

धामी सरकार की नीति से सकारात्मक परिवर्तन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनकी सरकार ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर खोलने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इस संबंध में धामी सरकार की नीति से सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगे हैं। मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के अनुसार-मत्स्य पालकों को विपणन सहायता उपलब्ध कराने हेतु वर्ष 2024 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ एमओयू किया गया, जिसके अंतर्गत अब तक ₹2.10 करोड़ मूल्य की 45.10 मीट्रिक टन ट्राउट मछली की आपूर्ति की जा चुकी है।

मत्स्य क्षेत्र का दायरा बढ़ा, निरंतर हो रही प्रगति

राज्य में मत्स्य क्षेत्र निरंतर प्रगति कर रहा है। विभागीय मंत्री सौरभ बहुगुणा ने बताया कि वर्ष 2022 तक जहां राज्य में मात्र 10,011 मत्स्य पालक थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 15,657 हो गई है। इनमें 3,584 महिला मत्स्य पालक शामिल हैं। मत्स्य उत्पादन वृद्धि दर वर्ष 2012-17 में जहां मात्र दो प्रतिशत थी, वह बढ़कर वर्ष 2022-26 में 11 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2026-27 में राज्य अंतर्गत 11,805 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जिसका मूल्य लगभग ₹165 करोड़ है।

विभाग का बजट भी बढ़ा, नौकरी के अवसर भी

मत्स्य पालन मंत्री सौरभ बहुगुणा के अनुसार, मत्स्य विभाग का वार्षिक बजट वर्ष 2021-22 में ₹55.76 करोड़ से बढ़ कर वर्ष 2026-27 में ₹261.41 करोड़ हो गया है। पिछले चार वर्षों में मत्स्य पालन क्षेत्र में 5,646 मत्स्य पालकों हेतु स्वरोजगार के अवसर सृजित किए गए। विभाग में 33 नियमित नियुक्तियां की गई हैं।

सरकार की योजनाएं हो रहीं गेम चेंजर साबित

मत्स्य पालन मंत्री ने कहा कि सरकार के स्तर पर शुरू की गईं नवीन ट्राउट प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना आदि के सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे है। मत्स्य क्षेत्र वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था के तीव्र गति से विकसित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों में से एक बन चुका है। साथ ही, ग्रामीण आजीविका, रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। प्रेस काॅफ्रेंस में निदेशक मत्स्य चंद्र सिंह धर्मशक्तू भी उपस्थित रहे।

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