हिमालय दिवस पर सरकार का ऐलान, हिमालय परिषद को मिलेगी 1 करोड़ की सौगात

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। सीएमने इस अवसर पर हिमालय परिषद् में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों में वृद्धि के लिए 1 करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की।

हर वर्ष दिया जाएगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’

मुख्यमंत्री धामी ने यह भी घोषणा की कि हिमालय के संरक्षण, संवर्धन एवं सतत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हिमालयी क्षेत्रों के लिए समर्पित विशिष्ट व्यक्तित्वों को ‘हिमालय विभूति सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान हर साल हिमालय दिवस के अवसर पर दिया जाएगा।

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सीएम ने किया विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित पोस्टरों का विमोचन

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित पांच पोस्टरों का विमोचन किया। इनमें 7वें देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल, साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग, सीमांत बाल विज्ञान कांग्रेस, ज्ञानोत्कर्ष और 21वीं उत्तराखंड राज्य साइंस कॉन्फ्रेंस के पोस्टर शामिल हैं। सीएम ने विज्ञान के लोकप्रियकरण पर केंद्रित पत्रिका ‘विज्ञान संप्रेषण’ के पांचवें वार्षिकांक का भी विमोचन किया।

संस्कृति और अस्तित्व का आधार है हिमालय

सीएम ने कहा कि हिमालय हमारे लिए केवल एक पर्वत श्रृंखला नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है। आदि काल से हिमालय हमारे ऋषियों, मुनियों, साधकों और विचारकों की तपोभूमि रही है। गंगा और यमुना सहित अनेक जीवनदायिनी नदियों का उद्गम हिमालय से होता है।

सीएम ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग आज पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती हैं और इनका प्रभाव हिमालयी क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ग्लेशियरों पर बढ़ता दबाव, पारंपरिक जल स्रोतों पर संकट और अतिवृष्टि, भूस्खलन, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं लगातार नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं। हिमालय की संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए विकास कार्यों में विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा और प्रकृति के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना आवश्यक है।

हिमालय संरक्षण के लिए जनभागीदारी महत्वपूर्ण: CM

सीएम ने कहा कि हिमालय संरक्षण के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से 2 सितंबर के बुग्याल दिवस से 9 सितंबर के हिमालय दिवस तक पूरे सप्ताह को ‘हिमालय दिवस सप्ताह’ के रूप में मनाने की शुरुआत की गई है। हिमालय संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रमों और सेमिनारों तक सीमित न रहकर जन-जन का आंदोलन बनना चाहिए।

Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.

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