ABVP की जीत से ज्यादा SFI की चर्चा, DAV छात्रसंघ चुनाव ने दिए बड़े सियासी संकेत

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उत्तराखंड की राजनीति की नर्सरी कहे जाने वाले देहरादून के डीएवी पीजी कॉलेज छात्र संघ चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। ABVP ने एक बार फिर अध्यक्ष पद पर अपना कब्जा तो जमा लिया है, लेकिन इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा एबीवीपी की जीत की नहीं, बल्कि वामपंथी छात्र संगठन SFI की जीत की हो रही है। जिसने बिना धनबल और बिना संसाधनों के केवल छात्र मुद्दों के दम पर एसएफआई के शैलेंद्र सिंह ने उपाध्यक्ष पद पर एकतरफा जीत दर्ज की है।

DAV PG College में अध्यक्ष पद पर ABVP के नवदीप राणा ने मारी बाजी

छात्र राजनीति में ‘मिनी विधानसभा’ का दर्जा रखने वाले डीएवी पीजी कॉलेज में इस बार का मुकाबला बेहद गहमागहमी भरा रहा। कैंपस में चले लंबे घमासान, पुलिस की लाठीचार्ज और मतगणना के दौरान हुए हंगामे के बीच आखिरकार चुनावी नतीजे घोषित कर दिए गए। अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के नवदीप राणा ने बाजी मारी, लेकिन उनकी जीत का अंतर महज 94 वोट रहा। काउंटिंग टेबल पलटने की कोशिशों और भारी तनाव के बीच नवदीप ने NSUI के सौरभ सेमवाल को पटखनी दी।

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उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला बड़ा जनादेश

हंगामे और कड़े मुकाबले के बीच सबसे चौंकाने वाला और बड़ा जनादेश उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला। जहां वामपंथी छात्र संगठन SFI के शैलेंद्र सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी हर्ष रावल को रिकॉर्ड 785 मतों के भारी अंतर से करारी शिकस्त दी। ऐसे दौर में जब देश की मुख्यधारा की राजनीति में वामपंथ को हाशिए पर माना जा रहा हो, वहां उत्तराखंड के सबसे बड़े कॉलेज में शैलेंद्र की यह जीत बेहद खास मानी जा रही है।

डीएवी में एक समय वेदिका वेद और लेखराज जैसे दिग्गज एसएफआई नेता छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके हैं। लेकिन बीते कुछ दशकों में धनबल और बाहुबल के प्रभाव के चलते वैचारिक राजनीति करने वाले दल लगातार पीछे छूटते चले गए। ऐसे माहौल में बिना किसी बड़े आर्थिक संसाधन और सत्ता के संरक्षण के, केवल धरातल के छात्र मुद्दों के दम पर मिली यह जीत संकेत दे रही है कि कैंपस के छात्रों के बीच भीतर ही भीतर कुछ बड़ा बदल रहा है।

डीएवी कॉलेज के मतदान नतीजों पर डालें नजर

अगर पूरे चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो डीएवी में छात्र संघ के 6 पदों के लिए कुल 28 प्रत्याशी मैदान में थे। अध्यक्ष पद पर मुकाबला बहुकोणीय रहा, जहां आर्यन संगठन के अमित सिंह 998 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। सचिव पद पर निर्दलीय प्रत्याशी नीलांश ने सत्यम शिवम संगठन के दीपक राणा को 402 मतों से हराया। वहीं सह-सचिव पद पर 10 प्रत्याशियों के बीच हुए कड़े मुकाबले में अनुष्का ठाकुर ने 892 वोटों से बड़ी जीत दर्ज की। वहीं कोषाध्यक्ष पद पर अंजलि भट्ट ने 1507 मतों के बड़े अंतर से बाजी मारी। इसके अलावा विश्वविद्यालय प्रतिनिधि अनुज डोभाल 1247 मत पाकर विजयी रहे।R): अनुज डोभाल 1247 मत पाकर विजयी रहे।

बहरहाल, DAV के इन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि सत्ता और संसाधनों की चमक-दमक के बीच आज भी आम छात्र जमीनी मुद्दों और संघर्ष करने वाले चेहरों पर भरोसा जताने से पीछे नहीं हटते। DAV कॉलेज का यह चुनाव सिर्फ एक कॉलेज का चुनाव नहीं है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यहां से निकलने वाली हवा प्रदेश की सियासत की दिशा तय करती है। अब देखना यह होगा कि उपाध्यक्ष पद पर मिली यह वैचारिक जीत कैंपस की राजनीति में कितना स्थायी बदलाव ला पाती है।

Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.

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