धराली आपदा के एक साल बाद बड़ा बदलाव! 33 करोड़ के काम से बदली पूरी भागीरथी घाटी की तस्वीर – Khabar Uttarakhand

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धराली आपदा के एक साल बाद बड़ा बदलाव! 33 करोड़ के काम से बदली पूरी भागीरथी घाटी की तस्वीर – Khabar Uttarakhand

एक साल पहले 5 अगस्त को आई भीषण आपदा ने धराली और आसपास की भागीरथी घाटी को गहरे जख्म दिए थे। कुछ ही पलों में मलबे ने वर्षों की मेहनत को अपनी चपेट में ले लिया। घर-दुकान, खेत-खलिहान, बाग-बगीचे, पशुधन और आजीविका के साधन प्रभावित हुए। चारों ओर मलबा, मायूसी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी।

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आपदा के एक साल बाद धराली की तस्वीर

धराली, हर्षिल और भटवाड़ी एक बार फिर उठ खड़े हुए हैं। सड़कें और दूसरी आधारभूत सुविधाएं बहाल हो रही हैं, खेतों में हरियाली लौट रही है, बाग-बगीचे फिर संवर रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ रही है। आपदा से उपजी निराशा की जगह अब पुनर्निर्माण और बेहतर भविष्य का विश्वास दिखाई दे रहा है।

सीएम ने खुद किया था प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने आपदा के पहले दिन से ही ‘राहत-बचाव से पुनर्वास और पुनर्वास से पुनर्विकास’ की रणनीति पर काम किया। सीएम ने खुद स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, पीड़ित परिवारों से मिले और राहत एवं पुनर्वास कार्यों की लगातार मॉनिटरिंग की। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि प्रभावितों की सहायता और आधारभूत सुविधाओं की बहाली में किसी भी स्तर पर देरी नहीं होनी चाहिए।

धामी सरकार ने पिछले एक साल में धराली के लिए क्या-क्या किया?

पिछले एक साल में धामी सरकार ने भागीरथी घाटी में केवल आपदा से हुई क्षति की भरपाई पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि लोगों की जिंदगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया। पशुपालन, सिंचाई, उद्यान, कृषि, खंड विकास, ऊर्जा, पर्यटन, लोक निर्माण तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहित विभिन्न विभागों के माध्यम से 16 करोड़ से अधिक के विकास एवं पुनर्वास कार्य किए गए। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को अलग-अलग मदों में 17 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। यानी बीते एक साल में 33 करोड़ से अधिक के विकास, पुनर्वास और आर्थिक सहायता के कार्यों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्र और परिवारों को संबल प्रदान किया गया।

सिर्फ सड़क-मकान नहीं सरकार ने दोबारा खड़ी की आजीविका

आपदा में कई परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती आजीविका की थी। किसी के बाग-बगीचे उजड़े थे तो किसी की फसल, पशुधन या कारोबार प्रभावित हुआ था। सरकार ने इसी जरूरत को समझते हुए पुनर्वास को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा।

बकरी और भेड़ पालन को प्रोत्साहन, उद्यानों की क्षति पर प्रतिपूर्ति, किसानों को फसल और पौध वितरण, कृषि गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए सहायता दी गई। सिंचाई व्यवस्था की बहाली के साथ पेयजल और विद्युत लाइनों को दुरुस्त करने का काम भी तेजी से किया गया।

क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी गई। साथ ही नदी किनारे बाढ़ सुरक्षात्मक कार्यों को आगे बढ़ाया गया, ताकि पुनर्निर्माण के साथ क्षेत्र को भविष्य की संभावित आपदाओं के प्रति अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

भागीरथी घाटी की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए पर्यटन गतिविधियों को पुनर्जीवित करने पर भी विशेष जोर दिया गया, ताकि स्थानीय कारोबार और रोजगार फिर से गति पकड़ सकें।

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