इतिहास में पहली बार!, गढ़वाली फिल्म ढोली ने जीता नेशनल अवॉर्ड – Khabar Uttarakhand

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गढ़वाली सिनेमा ने इतिहास रच दिया है। पहली बार किसी गढ़वाली फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। जो कि हर एक उत्तराखंडी के लिए गर्व की बात है। 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में फिल्म ‘ढोली’ को फीचर फिल्म कैटेगरी में बेस्ट गढ़वाली फिल्म चुना गया।

गढ़वाली फिल्म ढोली की कहानी dholi garhwali film

करीब 85 मिनट की ये फिल्म एक ढोली, यानी पारंपरिक ढोल वादक और उसके परिवार के संघर्ष की कहानी है। ये फिल्म उस कड़वी सच्चाई को दिखाती है कि समाज ढोल की आवाज़ का सम्मान तो करता है, लेकिन उसे बजाने वाले कलाकार को अक्सर बराबरी का सम्मान नहीं देता फिल्म इसी सोच को चुनौती देती है जो कि इसे और भी ज्यादा खास बनाती है।

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ढोली’ में स्थानीय बोली को खूबसूरती से दर्शाया गया

‘ढोली’ में सिर्फ एक परिवार की कहानी को ही नहीं दर्शाया गया है। ‘ढोली’ में गढ़वाल की लोक संस्कृति, गांव का जीवन, पारंपरिक वाद्ययंत्र, रीति-रिवाज और स्थानीय बोली को बेहद खूबसूरती से बड़े पर्दे पर उतारा गया है। यही वजह है कि इसे उत्तराखंड की संस्कृति को सिनेमा के माध्यम से दुनिया तक पहुंचाने वाली अहम फिल्म माना जा रहा है।

उत्तरकाशी में हुई फिल्म की शूटिंग

फिल्म की शूटिंग उत्तरकाशी की खूबसूरत असीगंगा घाटी के नाल्ड गांव और आसपास के इलाकों में हुई है। इसमें उत्तराखंड के कई स्थानीय कलाकारों ने अभिनय किया है। जबकि इसके गीतों को लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने अपनी आवाज़ दी है।

‘ढोली’ को मिला नेशनल अवॉर्ड

दिलचस्प बात ये है कि नेशनल अवॉर्ड से पहले ‘ढोली’ ,2024 के कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित होने वाली उत्तराखंड की एकमात्र फिल्म थी। जिसे खूब सराहना भी मिली थी। अब राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बाद ‘ढोली’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि गढ़वाल की संस्कृति, लोक कलाकारों और उत्तराखंड की पहचान की आवाज़ बन गई है। उत्तराखंड और गढ़वाली सिनेमा के लिए ये गर्व का पल है।

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