उत्तराखंड में शहरों से ज्यादा गांवों पर महंगाई की मार, जानें अन्य राज्यों की तुलना में कैसा है हाल

Advertisement

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी अगस्त 2026 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) बढ़कर 4.65 प्रतिशत दर्ज की गई है। हालांकि, उत्तराखंड की यह महंगाई दर देश की कुल राष्ट्रीय औसत दर 4.82 प्रतिशत की तुलना में थोड़ी कम और नियंत्रण में है।

उत्तराखंड में शहरों से ज्यादा गांवों पर महंगाई की मार

मंत्रालय के आंकड़ों से साफ होता है कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई का असर शहरी इलाकों की तुलना में अधिक देखने को मिला। जहां ग्रामीण उत्तराखंड में अगस्त महीने के लिए महंगाई दर 5.09 प्रतिशत रही, वहीं शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 3.88 प्रतिशत दर्ज किया गया।

Advertisement
Advertisement

अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड की स्थिति

देश के सबसे अधिक महंगाई वाले राज्यों की सूची में जहां तेलंगाना (6.27%), तमिलनाडु (5.92 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (5.55 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (5.53 प्रतिशत) और ओडिशा (5.52 प्रतिशत) शीर्ष पर रहे, वहीं उत्तराखंड इन उच्च महंगाई वाले राज्यों से काफी नीचे है। उत्तराखंड के पड़ोसी राज्यों से तुलना करें तो उत्तर प्रदेश में संयुक्त महंगाई दर 5.09 प्रतिशत रही। वहां ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 5.58 प्रतिशत तो शहरी क्षेत्रों 4.04 प्रतिशत रही।

हिमाचल प्रदेश में संयुक्त महंगाई दर 3.85 फीसद रही। वहां ग्रामीण क्षेत्र में यह 3.72 प्रतिशत तो शहरी क्षेत्रो में 4.56 फीसदी रही।  हरियाणा में संयुक्त महंगाई दर 3.92 प्रतिशत रही। यहां ग्रामीण इलाकों में महंगाई दर 4.46 प्रतिशत तो शहरी क्षेत्र में 3.38 फीसद रही। उत्तराखंड की महंगाई दर उत्तर प्रदेश से कम है, लेकिन पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश और हरियाणा की तुलना में अधिक है।

पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में लग रही जेब पर चपत

उत्तराखंड के पर्वतीय एवं ग्रामीण अंचलों में महंगाई का उच्च स्तर 5.09 प्रतिशत आम नागरिकों के रसोई के बजट और दैनिक खर्चों को सीधे प्रभावित कर रहा है। भौगोलिक विषमताओं, कठिन परिवहन मार्गों और लॉजिस्टिक्स लागत के कारण आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर खाद्य सामग्रियों की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों तक आते-आते महंगी हो जाती है। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में सुगम आपूर्ति श्रृंखला और प्रतिस्पर्धा के कारण महंगाई दर 3.88 प्रतिशत पर सीमित रही।

राष्ट्रीय स्तर पर अगस्त 2026 में खाद्य पदार्थों की महंगाई दर (CFPI) 5.95 फीसद दर्ज की गई। इस अवधि के दौरान देशभर में अदरक (73.82 फीसद), प्याज (48.27 फीसद), लहसुन (43.60 फीसद) और आभूषणों के दामों में भारी बढ़ोतरी देखी गई। चूंकि उत्तराखंड अपनी अधिकांश खाद्यान्न और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की आपूर्ति के लिए बाहरी राज्यों पर निर्भर है, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य वस्तुओं और परिवहन सेवाओं (14.64 फीसद) की बढ़ती लागत का सीधा असर राज्य के बाजारों में भी देखा जा रहा है।

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

अगस्त माह में देश भर में उपभोक्ता वस्तुओं, होटल-रेस्तरां सेवाओं (8.38 फीसदी), और व्यक्तिगत देखभाल वस्तुओं (15.17 फीसद) के दामों में तेजी दर्ज की गई है। उत्तराखंड जैसे पर्यटन-प्रधान राज्य के लिए रेस्तरां और आवास सेवाओं की बढ़ती दरें स्थानीय व्यापार और पर्यटकों के बजट दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि उत्तराखंड में 4.65 प्रतिशत की महंगाई दर राष्ट्रीय औसत 4.82 प्रतिशत से नीचे है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संतोषजनक दायरे के भीतर है, फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत से से ऊपर की दर चिंता का विषय है। ग्रामीण इलाकों में मांग बनाए रखने और पलायन की समस्या को नियंत्रित करने के लिए जरूरी है कि राज्य सरकार स्थानीय आपूर्ति प्रणालियों को मजबूत करे और आवश्यक वस्तुओं के परिवहन पर आने वाली लागत को कम करने की कोशिश करे।

Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement