निलंबित चल रहे शेर सिंह ने CJP मंच से दिया ‘इस्तीफा’, पुलिस बोली- सक्रिय सेवा में ही नहीं, फिर किस पद से इस्तीफा? – Khabar Uttarakhand

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निलंबित चल रहे शेर सिंह ने CJP मंच से दिया ‘इस्तीफा’, पुलिस बोली- सक्रिय सेवा में ही नहीं, फिर किस पद से इस्तीफा? – Khabar Uttarakhand

दिल्ली में चल रहे CJP के आंदोलन के दौरान उत्तराखंड पुलिस के लंबे समय से निलंबित चल रहे सिपाही शेर सिंह द्वारा मंच से तथाकथित “इस्तीफा” देने का प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटनाक्रम के बाद यह प्रश्न उठ रहे हैं कि जो व्यक्ति पिछले एक साल से अधिक समय से निलंबित है और सक्रिय पुलिस सेवा में नहीं है, उसके द्वारा दिया गया ये तथाकथित इस्तीफा आखिर किस पद से है और इसका वास्तविक औचित्य क्या है।

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निलंबित चल रहे शेर सिंह ने CJP मंच से दिया ‘इस्तीफा

आपको बता दें कि शेर सिंह साल 2025 से एक गंभीर आपराधिक प्रकरण में नामजद होने के बाद उत्तराखंड पुलिस से निलंबित चल रहा है। उसके विरुद्ध थाना गंगनहर, जनपद हरिद्वार में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 467, 468, 471, 120-बी तथा भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 111(2)(बी), 351(2) व 352 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था।

हत्या, अपहरण जैसे मुकदमें दर्ज

जांच में ये सामने आए कि हरिद्वार-रुड़की क्षेत्र के कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि, जिसके विरुद्ध हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण, अवैध वसूली और भूमि पर अवैध कब्जे सहित अनेक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। जो वर्तमान में जेल में निरुद्ध है, द्वारा संचालित आपराधिक गिरोह में शेर सिंह की भी सक्रिय भूमिका पाई गई। आरोप है कि शेर सिंह ने मनीष बॉलर, हसन अब्बास जैदी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर स्थानीय लोगों को डराकर उनकी भूमि पर अवैध कब्जा करने और उससे आर्थिक लाभ अर्जित करने में सहयोग किया।

उत्तराखंड पुलिस में कॉन्स्टेबल ने अपने पद का किया दुरुप्रयोग

जांच के अनुसार, रुड़की निवासी एक विधवा महिला व उसके परिवार को गैंग द्वारा लगातार धमकाया गया। आरोप है कि पीड़िता के भाई और देवर पर पहले गैंग द्वारा गोलीबारी की गई। जिसके बाद भयवश पीड़िता अपने बच्चों सहित अन्य स्थान पर रहने चली गई। इसी दौरान उसकी भूमि पर अवैध कब्जा कर उसे फर्जी तरीके से बेच दिया गया।

प्रकरण में ये भी सामने आया कि उस समय उत्तराखंड पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात शेर सिंह ने अपने पद का दुरुप्रयोग करते हुए कुख्यात अपराधी प्रवीण वाल्मीकि से सितारगंज जेल एवं रुड़की न्यायालय में कई बार मुलाकात की। साथ ही पीड़िता व उसके परिवार को मुकदमा वापस लेने के लिए धमकाने का प्रयास किया।

आरोप है कि न्यायालय में पेशी के दौरान भी पीड़िता को अपराधी के सामने ले जाकर डराया-धमकाया गया। साथ ही गैंग के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर विवादित भूमि के अवैध सौदे से लाभ अर्जित किया गया।

जेल जा चुका है शेर सिंह, जमानत पर बाहर

प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के उपरांत शेर सिंह को दिनांक 15 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था। बाद में उसे 7 नवंबर 2025 को माननीय उच्च न्यायालय, नैनीताल से जमानत प्राप्त हुई। गिरफ्तारी के उपरांत विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। तब से वो सक्रिय पुलिस सेवा में नहीं है।

मीडिया का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश

ऐसी स्थिति में दिल्ली के आंदोलन के मंच से तथाकथित “इस्तीफा” देने की घोषणा को लेकर स्वाभाविक रूप से अनेक प्रश्न उठ रहे हैं। चर्चा का विषय ये है कि लंबे समय से निलंबित एवं सक्रिय सेवा से बाहर चल रहे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार का सार्वजनिक प्रदर्शन वास्तविक त्यागपत्र है या केवल जनभावनाओं और मीडिया का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास

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