विष्णुगाड-पीपलकोटी टनल हादसा: PM मोदी से हस्तक्षेप की मांग, स्वतंत्र जांच की उठी आवाज

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सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने 13 अगस्त 2026 को उत्तराखंड के चमोली में टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड की विष्णुगाड–पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग के भीतर हुई दुर्घटना के बाद पीएम मोदी को पत्र लिखकर उनके हस्तक्षेप की मांग की है। नौटियाल ने दुर्घटना की स्वतंत्र एवं समयबद्ध विशेषज्ञ जांच, मृत श्रमिकों के परिवारों को घोषित 5 लाख की सहायता राशि बढ़ाकर THDC इंडिया लिमिटेड की ओर से न्यूनतम 1 करोड़ किए जाने और प्रभावित परिवारों के लिए मजबूत सहायता व्यवस्था की मांग की है।

सुरंग हादसे को लेकर अनूप नौटियाल ने PM मोदी को लिखा पत्र

नौटियाल ने अपने पत्र में कहा कि 13 अगस्त की घटना को परियोजना स्थल पर पहले हुई गंभीर घटनाओं के संदर्भ में देखा जाना आवश्यक है। जुलाई 2024 में आई फ्लैश फ्लड से परियोजना के बैचिंग प्लांट, मशीनरी और संबंधित बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने की सूचना थी, जबकि अगस्त 2025 में डैम साइट पर हुए भूस्खलन में 12 श्रमिक घायल हुए थे, जिनमें चार गंभीर रूप से घायल थे। 30 दिसंबर 2025 को परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग के भीतर परिचालन कर रही दो लोको ट्रेन आपस में टकरा गई थीं, जिसमें बाद की आधिकारिक रिपोर्टों में घायलों की संख्या 88 बताई गई थी।

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नौटियाल ने उठाया अपर्याप्त मुआवजे का मुद्दा

पत्र में मुख्य रूप से अपर्याप्त मुआवजे का मुद्दा उठाया गया है। जहां टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने हर मृत श्रमिक के परिवार को 5 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है, वहीं अनूप नौटियाल ने इसे बढ़ाकर न्यूनतम 1 करोड़ किए जाने की मांग की है। यह राशि वैधानिक मुआवजे, बीमा, लंबित वेतन, रोजगार से संबंधित बकाया तथा अन्य सभी वैधानिक अधिकारों के अतिरिक्त होनी चाहिए। उन्होंने घायल श्रमिकों के लिए भी सहायता राशि में आनुपातिक वृद्धि तथा जहां संभव हो, प्रत्येक प्रभावित परिवार के कम से कम एक पात्र सदस्य को उपयुक्त रोजगार दिए जाने की मांग की है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि मुख्य ​कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी को अनुबंध या सब-कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था के माध्यम से कम नहीं किया जाना चाहिए। चूंकि प्रमुख सुरंग निर्माण सहित सिविल कार्य ईपीसी व्यवस्था के तहत हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिए गए हैं, इसलिए ​संस्था को प्रभावित श्रमिकों के लिए लागू मुआवजा, बीमा, वैधानिक लाभ एवं पुनर्वास सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए।

स्वतंत्र जांच की मांग

पत्र में टनलिंग, हिमालयी भूविज्ञान एवं आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। जांच में दुर्घटना के तात्कालिक एवं मूल कारणों को स्थापित किया जाना चाहिए, यह आकलन किया जाना चाहिए कि क्या इस हादसे को उचित सावधानियों के माध्यम से रोका जा सकता था, श्रमिकों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं, तथा जहां भी लापरवाही या नियमों के अनुपालन में कमी सामने आए, वहां जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि यह मुद्दा केवल एक परियोजना या एक दुर्घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय हिमालयी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। 20 जुलाई 2026 को सिक्किम में निर्माणाधीन तीस्ता जलविद्युत परियोजना की सुरंग में हुई दुर्घटना, जिसमें कथित तौर पर 25 लोगों की मौत हुई, तथा नवंबर 2023 की उत्तराखंड की सिलक्यारा–बड़कोट सुरंग घटना, जिसमें 41 श्रमिक 17 दिनों तक भूमिगत फंसे रहे, हिमालय में बड़े भूमिगत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े विशिष्ट भूवैज्ञानिक एवं परिचालन जोखिमों को सामने लाती हैं।

पिछले कई सालों से अनूप नौटियाल हिमालयी क्षेत्र में विकास की योजना एवं क्रियान्वयन के तरीके को लेकर लगातार चिंता उठाते रहे हैं। विशेष रूप से वे पारिस्थितिक सीमाओं को पहचानने, आपदा तैयारियों को मजबूत करने और संस्थागत जवाबदेही बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। ​मेकिंग मोलेहील्स ऑफ़ माउंटेन्स श्रृंखला एवं अन्य साक्ष्य-आधारित दस्तावेजीकरण के माध्यम से उन्होंने लगातार ऐसे विकास मॉडल की वकालत की है जिसमें वैज्ञानिक आकलन, पारदर्शिता, रोकथाम एवं सामुदायिक सुरक्षा पर अधिक जोर हो।

नौटियाल ने कहा कि उद्देश्य ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ना होना चाहिए जो आपदा के बाद केवल राहत, बचाव एवं मुआवजे तक सीमित न रहे, बल्कि रोकथाम, सीखने और जवाबदेही को प्राथमिकता दे। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से विष्णुगाड–पीपलकोटी दुर्घटना से संबंधित तत्काल मांगों पर विचार करने के साथ-साथ भारतीय हिमालयी क्षेत्र में सुरक्षित सुरंग बुनियादी ढांचे के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचा विकसित करने की पहल करने का आग्रह किया है।

Khabar Uttarakhand – Uttarakhand News.

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