डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट देने वाली दवा कंपनियों पर कसेगा शिकंजा,फार्मा कंपनियों की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

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फार्मा कंपनियों की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र को कमेटी बनाकर कानून के सुझाव देने का आदेश

नई दिल्ली। दवा बेचने के लिए डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट, विदेश यात्राएं और नकदी जैसे फायदे देने वाली फार्मा कंपनियों पर अब कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी है। दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए अपनाई जाने वाली कथित अनैतिक मार्केटिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को विशेष कमेटी गठित करने का आदेश दिया है, जो ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कानूनी प्रावधानों की सिफारिश करेगी। 

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सवाल सिर्फ दवा कंपनियों के कारोबार का नहीं, बल्कि मरीजों की जेब और इलाज से जुड़े फैसलों की निष्पक्षता का भी है। यह मामला फेडरेशन ऑफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएमएसआरएआई) की वर्ष 2021 में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में मांग की गई है कि डॉक्टरों को उपहार और दूसरे लाभ देकर दवाओं की बिक्री बढ़ाने वाली कंपनियों की जवाबदेही तय की जाए और इस कथित अनैतिक प्रथा पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया कि कंपनियां अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को महंगे उपहार, विदेश यात्राएं, नकद राशि और अन्य सुविधाएं देती हैं। ऐसी गतिविधियों से दवाएं लिखने के फैसले प्रभावित होने और मरीजों को महंगी या गैरजरूरी दवाएं दिए जाने की आशंका जताई गई है। पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार ने नियमों की रूपरेखा तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित होने वाली कमेटी अनैतिक मार्केटिंग पर अंकुश लगाने के लिए कानूनी उपाय सुझाएगी। कमेटी आम लोगों, विशेषज्ञों और संबंधित संस्थाओं के सुझावों व आपत्तियों पर विचार कर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगी। केंद्र को कमेटी के गठन और आगे की कार्रवाई का ब्योरा हलफनामे में पेश करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी, जिसमें सरकार को प्रगति रिपोर्ट देनी होगी।

 गिफ्ट कंपनियों के, कीमत मरीज क्यों चुकाएं?

दवा का चुनाव मरीज की जरूरत और डॉक्टर की चिकित्सकीय सलाह के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी व्यावसायिक फायदे के दबाव में। डॉक्टरों को लाभ देकर बिक्री बढ़ाने की कथित प्रथा पर प्रभावी रोक और कंपनियों की जवाबदेही तय करना ही इस मामले की सबसे बड़ी कसौटी है।

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